रविवार, 1 मार्च 2015

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‘पचास ठो परछाई आफ 'ग्रे 'भूरा ,नीला ,काला ( जो भी हो )

आजकल एक फिल्म की बड़ी चर्चा सुनी है ,
जो किसी कामुक उपन्यास को आधार बना कर लिखी गयी है !
( कहा से देखि यह मत पूछिए ,लिंक याद नहीं ,किसी भी मूवी साईट पर मिल जाएगी ,
हा इंग्लिश सबटाईटलस नहीं मिल पायेंगे फिलहाल और चाईनीज सबस अटैच रहेंगे )
 वैसे भी ऐसी फिल्म कोई डायलोग सुनने के लिए थोड़े ही देखता है ( हीहीही ) ! 
फिल्म का नाम तो समझ ही गए होंगे ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ़ ग्रे ‘ !
इसमें एक अरबपति है ,एक एक कॉलेज इन्टर्न है ,उनकी लव स्टोरी है ( बाबाजी का  #@ ) ! 
होता यु है के हिरोइन जिसका नाम कुछ अजीब सा है याद नहीं रहता ! 
कुछ रुसी टोन लिए हुए ,लास्ट के कुछ अक्षर ही याद है ‘स्टिसिया ‘ जैसा कुछ , 
तो ये एक कॉलेज इन्टर्न है और इसी सिलसिले में एक अरबपति बिजनेसमैन के इंटरव्यू के लिए आती है !
  ( उसका नाम भी याद नहीं ,जब हिरोइन का नाम नहीं याद तो हीरो ( खलनायक )
 का नाम याद रखने की उम्मीद बेमानी है हीहीही )  तो उस उद्योगपति को यह ‘स्टिसिया ‘ 
या जो भी है कुछ ज्यादा पसंद आ जाती है ,और स्टिसिया भी उसे पसंद करने लगती है ,
 खलनायक या हीरो एक मतलबी इंसान है कामुक है और सैडिस्ट है  ( सैडिस्ट बड़ी कुत्ती चीज होते है , 
सात खून माफ़ वाला इरफ़ान खान याद कर लीजिये ) और वह स्टिसिया से एक
 कांट्रेक्ट साईंन करवा लेता है जिसमे वह उससे प्यार में बाधा उत्पन्न नहीं करेगी 
और जैसे चाहे वैसे प्यार करने देगी !
अब हिरोइन को का मालुम ई कैसन प्यार करी ? तो रेडी हो जाती है ,
खलनायक या नायक बचपन में अपनी किसी महिला रिश्तेदार द्वारा सताया हुवा है है
 इसलिए वह ही सैडिस्ट है ! तो शुरू होता है एक अभूतपूर्व अविस्मरनीय प्रेम के
 शाश्वत अनुभुतिवाला सिलसिला ,जो शुरू शुरू में तो ‘स्टिसिया ‘ को अच्छा लगता है
 लेकिन बाद में पता चलता है के ‘’ ई तुमसे न हो पायेगा ‘’ और नायक खलनायक
 ( अब इग्नोर करूँगा इस शब्द को ,बड़ी तकलीफ दे रहा है )
 नित नई नयी प्रक्रियाये आजमाता है ! 
प्यार में उपयोगी अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित कमरे में इतनी वैरायटी भरी पड़ी है के अमेरिका की
 डिफेन्स मिनिस्ट्री भी पानी भरे ! तो आखिरकार नायिका या जो भी है ,
उसके बर्दाश्त की हद पार हो जाती है और वह ब्रेकअप करने का फैसला लेती है
 ( हर और से ‘ब्रेक ‘ होने के बाद )
और कांट्रेक्ट की ऐसी तैसी करते हुए सब खत्म कर लेती है , 
( ऐसा कान्ट्रेक्ट बनता कहा है ? कौन सी सरकार है भाई ? )

इसी के साथ फिलिम या ‘ब्लू ‘ वाली जो भी कहो खत्म हो जाती है ! 
बस फिल्म खत्म होते समय फिल्म के नायक या खलनायक को देख कर ‘मर्डर ‘ का ‘इमरान हाश्मी ‘ 
याद आ जाता है ,चलो चलो भट्ट घराने के लिए एक और इंस्पिरेशन मिल गयी अगले फिल्म के लिए ! 
तैयार रहिएगा बोलीवूड के थके वर्जन के लिए ( वैसे ओरिजनल कौन सी कम थकी हुई है )

2 टिप्‍पणियां:

  1. Lag he raha Tha mere KO Ki film me hype jydaa hai sensuality naam Ki koi cheez nahi hogi... Trailer dekha tha tabhi laga tha Ki movie tine waste he hogi....

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    1. बिलकुल सही समझा आपने भीष्म भाई !

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