रविवार, 24 मई 2015

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फिल्म एक नजर में : तनु वेड्स मनु 2


 
फिल्म की शुरुवात वही से होती है जहा इसका प्रथम भाग समाप्त हुवा था ,
यानी तनु एवं मनु के विवाह के बाद ! 
तनु एवं मनु अपने विवाह को पांच साल निभा चुके है या कहा जाए झेल चुके है ,
शुरुवाती दिनों का प्रेम जल्द ही साबुन के झाग की तरह बैठ गया ,और दोनों के विपरीत स्वभाव जिन्होंने दोनों का रिश्ता मजबूत बनाया था ,वही इनके अलगाव का कारन बनता है !
मनमुटाव एवं झगड़ो के चलते अब दोनों अलग हो चुके है , और तनु भी वापस कानपूर आ चुकी है ,जहा परिवार वाले फिर से उसकी उल जलूल एवं बिंदास हरकतों से परेशान हो जाते है ! मनु ( आर माधवन ) भी अब लखनऊ आ चूका हा और मनु को फिर से पाने का प्रयास करता है किन्तु उसके हाथ निराशा ही लगती है !
तब उसकी जिंदगी में आती है दत्तो ( कंगना ,दोहऋ भूमिका में ) जो एक एथलीट है , उसकी शक्ल काफी हद तक तनु से मिलती है , पहले मनु उसे तनु समझ कर पीछा करता है किन्तु ग़लतफ़हमी दूर होने पर वह दत्तो के स्वभाव से प्रभावित होकर उसके प्रेम में पड़ जाता है !
दूसरी ओर तनु भी अपने पुराने प्रेमी ‘अवस्थी ‘( जिमी शेरगिल ) की ओर उम्मीद से लौटी है किन्तु उसका मन कही न कही मनु में ही बंधा हुवा है जिसे अवस्थी भी समझता है ,और वह उसे समझाने का प्रयास भी करता है ! यहाँ एक संयोग यह होता है के जिस लडकी से वह विवाह करने वाला है वो दत्तो ही है ,जिसके चलते मनु के दुबारा अपनी राह में आते देख वह भडक जाता है !
मनु एवं दत्तो विवाह करने की तैय्यारिया भी करने लगते है ! फिर क्या होता है यह फिल्म में ही देखे तो ज्यादा अच्छा रहेगा ,फिल्म में तनु के चरित्र से जहा दर्शको को चिढ होने लगती है तो वही दत्तो के चरित्र से सहनुभूति भी होने लगती है ! कंगना राणावत बेशक फिल्म की हीरो है ,किन्तु जिमी भी यहाँ अपना कमाल दिखाते है जबकि उनका रोल बहुत छोटा है , अपने देसी रोल में वे इस बार पहले की तरह खूंखार जरुर है किन्तु निगेटिव नहीं लगते  !
माधवन दबे से नजर आते है ,
फिल्म मनोरंजन करती है ,किन्तु मध्यांतर के पश्चात धीमी हो जाती है , जल्द ही वापस अपनी गति पकडती है !  गीत हिट जरुर है लेकिन ख़ास असर नहीं छोड़ते , पम्मी के रूप में दीपक डोबरियाल उवर एक्क्तिंग करते है ,जिससे थोड़ी चिढ हो सकती है , दत्तो के किरदार में कंगना ने कमाल का अभिनय किया है ! उनकी हरियाणवी शैली से लगता ही नहीं के यह कंगना रानावत है ,बल्कि वाकई भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है के कही यह दत्तो सच में ही तो कोई हरियाणा की एथलीट तो नहीं !
फिल्म में एक दर्शक के नाते आप तनु के बजाय दत्तो के पक्ष में ज्यादा नजर आयेंगे और यही इसकी खासियत है !  अभिनय पक्ष मजबूत है , हल्की फुलकी फिल्म है , एक दृश्य पर हंसी आती है जब जिमी को पता चलता है के तनु के खोने के बाद वह जिस लडकी को तनु की हमशक्ल मान कर शादी करनेवाला है ( दत्तो ) उसी से मनु का रिश्ता हो रहा है ,तो वह खीज जाता है और तनु को कहता है ,
आपके मनु जी न खुद चैन से रहेंगे न रहने देंगे ,पहले आप को हमसे छीन के ले गए ,फिर जब आपकी हमशक्ल से शादी कर रहे है तो अब उसे भी ले जा रहे है ये तो वही बात हुयी ! ‘’साला ,ओरिजनल भी हम ही रखेंगे और डुप्लीकेट भी ‘ हम करे तो क्या ?
बढ़िया फिल्म है ,अवश्य मनोरंजन करेगी ! देख सकते है .
चार स्टार
देवेन पाण्डेय 

1 टिप्पणी:

  1. aapke aur hamare vichaar kitne mel khatey hai... abhi padhi aapki samiksha aur kal he dekhi ye film hamne... kuch point hamare aur aapke review ke miltey hai jab ki hamne abhi padha aapka review.

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