मंगलवार, 28 जून 2016

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फिल्म एक नजर में : रमन-राघव 2.0

Raman Raghav 2.0 Review [Spoiler Alert]
*Director - Anurag Kashyap
*Star Cast - Nawazuddin Siddiqui, Vicky Kaushal, Sobhita Dhuliwala
*Production Company - Phantom Films
*Budget - ₹3.5 Crores
"अनुराग कश्यप" हमेशा कुछ अलग लेकर आते हैं अपनी फिल्मों में, 
ज्यादातर सच्ची घटनाओं को अपना देसी तड़का देकर पेश करते हैं जो दर्शकों को बेहद पसंद आती हैं 
और इसबार भी ऐसा ही है।
फिल्म की कहानी 60 के दशक के कुख्यात साइको सीरियल किलर "रमन राघव" की बिलकुल नहीं है,
 इस फिल्म के पागल किरदार को उस पुराने "रमन राघव" का अपग्रेडेड वर्जन कह सकते हैं
 (Version 2.0) जिसने बचपन में रमन-राघव पर काफी रिसर्च की थी जिस वजह से 
वह रमन को अपना प्रेणनाश्रोत मानने लगा और उसी जैसी हरकतें करने लगा....
कहानी के इस सेटअप से अनुराग ने रमन राघव के 60s के कांडों और 
उसकी जीवनी को वर्तमान में दिखाने की कोशिश की है...
कि वैसा पागल अगर आज के डेट में हो तो क्या हो? 
अगर आप रमन राघव के विषय में इन्टरनेट पर रिसर्च करेंगे तो जो-जो चीज़ें उसने अपनी जिंदगी में की, 
जैसा उसका अंदाज़ था, जो पागलपन था वो सारी चीज़ें आपको इस फिल्म के किरदार में पिरोयी हुयी दिखेंगी
। फिल्म में साइको किरदार का नाम रमन/रमणा है,
 और एक अव्वल नशेड़ी पुलिसवाले का नाम राघव/राघवन..
.इन दोनों के नाम जुड़कर होते हैं "रमन-राघव"...
और सिर्फ नाम ही नहीं दोनों की जिंदगियां और कहानियाँ भी अंत तक एक-दूजे से
 जुड़ी हुयी होती हैं भले की क्लाइमेक्स तक वे भिन्न दिखती हों।
खूबियाँ -
*फिल्म में कुल 8 चैप्टर्स हैं, बिलकुल किसी बुक की तरह [एक विडियो बुक] 
जो एक बिलकुल अलग अनुभव देता है फिल्म देखने का और उत्सुकता बनाये रखता है।
*फिल्म में सबने बेहतरीन एक्टिंग की है, 
और नवाजुद्दीन की एक्टिंग क्लास पूरी दुनिया में और कहीं नहीं..
.वो बिलकुल अनोखी है और जबरदस्त है...फिल्म "किक" में नवाज का पागलपन भरा ठहाका देखकर
 हम सबने ये जरुर सोचा होगा कि यार इन्हें किसी साइको का रोल करना चाहिए 
और हमारा वो सपना इसमें पूरा हो गया।
"विक्की कौशल" नए और तेजी से उभरते अभिनेता हैं जो किरदार राघवन के साथ पूरा न्याय करते हैं।
*फिल्म आखिर तक सस्पेंस बनाये रखने में पूरी तरह से कामयाब होती है।
*अनुराग कश्यप से सेंसर बोर्ड जिस कदर खौफ खाता है वो हम सभी को पता है..
.यही कारण हैं कि सेंसर की कैंची इसमें 5% से ज्यादा नहीं चली है।
*फिल्म में डार्कनेस है, Maturity है, हर पल दो पल पर हसने और चकित होने की वजहें हैं 
और सबसे बड़ी चीज़ फुल ऑफ़ पागलपन है [Madness Meets Mayhem] ।
खामियाँ -
*फिल्म के क्लाइमेक्स को और पॉलिशिंग, डिटेलिंग और टाइमिंग देने की जरुरत थी...
इसका क्लाइमेक्स संतोषजनक नहीं रहा है, 
भले ही क्लाइमेक्स पूरा प्लाट बर्बाद न करता हो लेकिन पब्लिक को और जबरदस्त क्लाइमेक्स की उम्मीद थी,
 जिसके लिए वे अंत तक सीट पकड़कर बैठे थें।
*फिल्म कोई भी, किसी भी तरह का कोई संदेश नहीं देती.
समीक्षक : विशाल पाण्डेय 
..खैर यह एक पागल के पागलपन की कहानी है...या शायद दो पागलों की! 
तो इस फिल्म से किसी भी तरह की कोई प्रेणना लेने की न सोचें 
और किरदारों को समझें कि वे पगलेट हैं...जिनसे प्रेणना सिर्फ उनकी बिरादरी वालों को लेना चाहिए।
*जिन लोगों को फिल्म में गाली-गलौज, डार्कनेस, 
बोल्ड/इंटिमेट सीन्स पसंद नहीं वे न ही देखें तो बेहतर...इस पॉइंट को खामी कहना सही नहीं,
 लेकिन उन लोगों के लिए है जिन्हें ये सब पसंद नहीं..
.और हमारे ख्याल से फिल्म बिना इन चीज़ों के अधूरी ही लगती।
My Ratings - 7/10
विशाल पाण्डेय 

1 टिप्पणी:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " सही उपयोग - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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