रविवार, 12 अगस्त 2018

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यूट्यूब टुटोरियल्स पदवी धारी



तकनीक ने आजका जीवन एकदम सुगम कर दिया है। कोई भी समस्या ऐसी नही रह गई है
जिसका हल आपको इंटरनेट और तकनीक के सहारे नही मिल सकता। कुछ वर्षो पहले नेट
बैंकिंग एक बहुत ही मानी हुई चीज मानी जाती थी। जिसे नेटबैंकिंग आती तो उसका रुतबा ही अलग होता था।
किन्तु समय बदला जहा पहले एक जीबी इंटरनेट के लिए ढाई सौ रूपये खर्च करने पड़ते थे, वही अब डेढ़ से तीन जीबी
डेटा भी मात्र दो चार सौ रूपये में तीन महीने के लिए मुफ्त मिल जाता है। अब हर चीज यूट्यूब से सिखना आसान हो गया है,
लोग कम्प्यूटर में खराबी आने पर भी चुटकियों में यूट्यूब पर टुटोरियल्स देख कर उसे बनाना सिख लेते है।
इंटरनेट बैंकिंग हो, नेट सर्फिंग हो या फिर अंग्रेजी या अन्य भाषओं को सीखना, सबसे सुगम है यूट्यूब बस मतलब के चीज
का उल्लेख सर्च बॉक्स में कीजिये, आपकी मातृभाषा में ही आपको सैकड़ों टुटोरियल मिल जायेंगे।
नेट की सरल उपलब्धता के कारण अब देखने वालो की संख्या असीमित हो चुकी है, जहा तक सडकें तक न पहुंची हो,
इंटरनेट की पहुँच वहा तक हो चुकी है। धडाधड सैकड़ो यूट्यूब चैनल्स खुल रहे है। हर कोई अपना यूट्यूब चैनल खोले बैठा हुआ है।
जिसे ज़रा भी कौशल आता है या कौशल आने का भ्रम है वे सभी अपने अपने चैनल्स बना कर ‘रिच’ बना भी रहे है और ‘रिच’ भी बन रहे है।
किन्तु इस भागादौड़ी में कंटेंट और विविधता की इतनी कमी हो गई है,के २ मिनट का भी टुटोरियल बनाना हो तो उसे खिंच खांच कर पन्द्रह
मिनट का बना देंगे। उन पन्द्रह मिनट में से केवल २ ही मिनट विषय पर केन्द्रित होगा, बाकी मैटर बस भूमिका बनाने में निकल जायेगा
( जैसा इस वक्त मै कर रहा हु।) इसी प्रकार एक सज्जन थे जिनकी पसंदीदा पतलून फट गई थी।
वे भी यूट्यूब यूनिवर्सिटी से ज्ञान प्राप्त पदविधारी ही थे। तो झटपट मोबाइल में यूट्यूब ओपन किया और हिंदी
टाइपिंग की सहायता से ही सर्च में अपने मतलब की चीज टाइप कर ली “फटी पैंट उपयोगी कैसे बनाये?” और इंटर मार दिया।
सबसे उपर एक विडिओ का थम्बनेल दिखा जिसपर एक महाशय कुर्ता पहने और कंधे पर इंची टेप लटकाए भद्दी मुस्कान के साथ खड़े थे।
उनका अवतार ही ऐसा था के इन पदवीधारी महाशय को ये काम के और अनुभवी भी लगे। विडिओ की अवधि देखि तो १५ मिनट की थी।
चलो अब डेटा की फ़िक्र तो थी ही नहीं, इसलिए पन्द्रह मिनट क्या डेढ़ घंटे भी कोई महत्व नही रखते थे।
महाशय के विडिओ पर क्लिक करते ही सर्वप्रथम आपका टूथपेस्ट,नमक, कोयला, शुद्ध पानी वगैरह टाइप के एड आये,
गनीमत यह थी वहा स्किप करने का भी पर्याय उपलब्ध नही था। मजबूरन उन्होंने उसे झेला और विडिओ शुरू होती भयंकर म्यूजिक बजा
जिसका कपड़े सिलने सिलाने वाले प्रोफेशन से तो दूर दूर तक कोई नाता नही था। सम्भवत यह धुन किसी अंग्रेजी गाने के मध्य से सीधे
उठा कर चेप लिया गया था। एक कामचलाऊ और सस्ते ग्राफिक डिजाइन से जैसे तैसे बना यूट्यूब चैनल का लोगो एक आग
में से निकलता दिखाई दिया। जल्द ही आग का दायरा बुझ गया और उससे ही चैनल का नाम बन गया।
किसी सी ग्रेड फिल्म और साउथ फिल्मों की घटिया डबिंग वर्जन में प्रयुक्त किये जाने वाले ग्राफिक डिजाइन जैसे शीर्षक दिखे।
और अंतत: टुटोरियल के कर्ता धर्ता प्रस्तुत हुए। होते ही, हमारा चैनल सबस्क्राइब कीजिये, नोतिसिकिशन सबसे पहले प्राप्त करने
हेतु बेल आइकन दबाइए वगैरह बकैती की और काम शुरू कर दिया। पदवीधारी महोदय ने चश्मा ठीक किया, इयरफोन अच्छे
से कान में खोंसा।
“हे फ्रेंड्स! स्वागत है हमारे यूट्यूब चैनल ‘फटी जींस निकला धागा’ में।‘ एंकर ने बत्तीसी दिखाई, एंकर के पीले दांत हल्के से दिखाई दिए।
“क्या आप अपनी पतलून, जींस और पजामे के फटने से परेशांन है? और रफू करवाके अपने स्टेट्स पर रफू नही करवाना चाहते
तो यकीनन यह विडिओ आपके मतलब का है, आप सही जगह आये है। दोस्तों कई बार ऐसा होता है के कही आते जाते,
उठते बैठते हमारी पैंट किसी चीज में अटक कर फट जाती है, ऐसे में हमे बड़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ जाती है........
.( कुछ मिनटों तक ऐसी ही बकतियाँ चलती रही। और निदान के बजाय कारण गिनाये जाते रहे।)
पदवीधारी बड़े धैर्य से सुनते जा रहे थे, मानों वे गहनता से हर बात की तह तक जाने का प्रयास कर रहे हो।
“सर्वप्रथम आपको इसके लिए आवश्यक साहित्य की जानकारी होना चाहिए। आपके पास होना चाहिए एक इंचीटेप,
एक कैंची, एक नीले रंग का चोक, और एक टेबल। सिलाई मशीन। “ एंकर ने कहा। इसी के साथ बैकग्राउंड में एक ऐसे गीत
की धुन बजने लगी, जिसे आप पहचान ही नहीं पायेंगे के कहा से चुराई गई है। हल्के से याद आएगा लेकिन पहचान नही पाएंगे,
कुछ मिनट तक वह धुन आपको स्वयम के पहचाने जाने का दबाव डालते रहेगी किन्तु आप उसे नजरअंदाज करके आगे बढ़ जायेंगे।
“टेबल? सिलाई मशीन?” पदविधारी चौंक पड़े।
“जी हां। सही सुना आपने टेबल। वरना आप किस पर रख कर पैंट पर कार्य करेंगे? और सिलाई किससे करेंगे जनाब?
मशीन तो लगेगी ही। सुई धागे से बेहतरीन सिलाई तो होगी नही।“ एंकर मानो उन्ही के प्रश्न की उम्मीद लगाये बैठा था।
“नीले रंग की चोक ही क्यों?” पदवीधारी के मन में पुन:कुतुहल जागा।
“उसके पीछे कोई तकनीकी कारण नही है। नीला रंग मुझे पसंद है। आपके पास जिस भी रंग का उपलब्ध हो
आप उसे प्रयोग कर सकते है।“
एंकर मानो पदवीधारी के मन की बात पढ़ रहा हो।
पदवीधारी अब उद्विग्न होने लगे थे। सात मिनट बीत चुके थे।
“आप सबसे पहले पैंट को लीजिये। फिर अपनी कमर से घुटने तक इंचीटेप से नापिए।“
पदवीधारी ने बात नोट कर ली।
“अब अपनी कमर से घुटने तक का नाप आप ध्यान में रखिये। अब दुसरा स्टेप, जिस टेबल के बारे में बताया था उसी टेबल पर पैंट रखिये।
और पैंट की कमर से लेकर घुटने तक नाप लीजिये। उसके पश्चात अपने नाप के नम्बर तक एक नील चोक से निशान बना लीजिये।
या चाहे जो भी रंग का उपलब्ध हो आप उससे निशान बना लीजिये।“
पदवीधारी आगे की प्रक्रिया देखने को अत्यधिक उत्सुक थे।
“अब आपको लेनी है कैंची। कैंची से आपने पैंट के जहा तक निशान किया था, उस निशान से एक समानांतर रेखा
में कैंची से उसे काटिए।“
“फिर?” पदवीधारी ने पूछा।
“इसी प्रकार आप पैंट का दुसरा पायंचा भी समानांतर रेशा में काट लीजिये। उसके बाद प्रयोग होगा सिलाई मशीन का।“
एंकर मुस्कुराता हुआ यु बोला मानो कोई रहस्यमई प्रक्रिया दिखाने वाला हो।
“अब आप फटे हुए पायंचो को सलीके से एक इंच अंदर की ओर मोड़िये और उसपर सिलाई मशीन चला दीजिये।
सिलाई मशीन कैसे चलाए इस पर आप मेरा पिछला विडिओ देख सकते है, जो इसी चैनल पर मौजूद है।
अब आपकी पैंट के दोनों पायंचे अंदर से सिल चुके है। और आपकी पैंट एक स्टायलिश ‘चड्ढा’ बन चुकी है जिसे आप
शार्ट थ्री फॉर या बरमूडा भी कह सकते है, जो आपको निहायत ही सेक्सी लुक देगा। देखा कितना आसान है ना फटे हुए
पैंट को उपयोगी बनाना? तो मित्रों उम्मीद है आपको यह विडिओ पसंद आया होगा। ऐसे ही और उपयोगी टूटोरियल्स
के लिये सबस्क्राइब कीजिये और शेयर करना हरगिज न भूलिए। कमेन्ट बॉक्स में कमेंट्स कीजिये और लाइक भी।
अगले वीडियो तक के लिए विदा।“ कहकर एंकर ने मुस्कुराते हुए विदा ली, और फिर वही भयानक म्यूजिक बजी जिसका
कपड़े की सिलाई से या कपड़े से संबंधित किसी भी क्षेत्र से कोई लेना देना ही नहीं था। सी ग्रेड और सस्ता ग्राफिक डिजाइन दिखा
और अगला विडियो प्ले होने के लिए तैयार हो गया।
पदवीधारी त्रस्त हो गए, गुस्से में इयरफोन निकाला, और भुनभुनाने लगे।
“अबे मेरी पैंट पीछे से फटी है, पीछे से। और दूसरी बात जब पैंट फाडकर कर बरमुडा ही बनाना है तो सीधे सीधे काहे नही बोलता।“
भुनभुनाते हुए वे उठ खड़े हुए नेट बंद कर दिया। 

2 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, डॉ॰ विक्रम साराभाई को ब्लॉग बुलेटिन का सलाम “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर जी, इस सम्मान हेतु.

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