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रविवार, 21 अगस्त 2016

पुस्तक समीक्षा : खुनी जंग ( कारवां )


कुछ अरसे पहले याली ड्रीम्स क्रिएशन की होरर ग्राफिक नॉवेल ‘’कारवाँ ‘’ रिलीज हुयी थी जिसे काफी चर्चा मिली थी , उसकी सफलता से प्रेरित होकर उसका हिंदी रूपांतरण भी किया गया ,जो मेरे व्यग्तिगत विचार से अंग्रेजी से भी बेहतर बनी थी l चूँकि मैंने हिंदी और अंग्रेजी दोनों पढ़ी हुयी है तो तुलनात्मक रूप से यदि कहू तो हिंदी वर्जन में कही लगता ही नहीं के यह मूल रूप से अंग्रेजी ग्राफिक नॉवेल है ,यहाँ शब्द दर शब्द ट्रांसलेशन के बजाय भावार्थ को यथावत बनाये रखते हुए एक नयेपन और ताजगी के साथ ट्रांसलेशन किया गया था l
कारवा के हसीन पिशाचो की कहानी के मूल को दर्शाने हेतु अर्थात उसके प्रिक्वेल के लिए भी कुछ भागो में अलग से ‘’ब्लड वॉर ‘’ सीरिज लिखी गयी जो चार भागो में याली ड्रीम्स से पब्लिश भी हुयी और सराही भी गयी l
और मेरे द्वारा यह चारो भाग भी पढ़े जा चुके थे के इसे भी हिंदी में लाने की घोषणा हुयी l
इन चारो भागो को मिलाकर एक ही भाग में समेटा गया ,और कुल 128 पृष्ठों की हिंदी में नयी ग्राफिक नॉवेल बनी l
इसकी कहानी की शुरुवात होती है देवगढ़ से ,देवगढ़ चम्बल से सटा एक गाँव है 
जहा ठाकुर सूर्यप्रताप का ख़ासा दबदबा है ,चम्बल से सटे होने के कारण यहाँ हमेशा 
से दस्यु गिरोहों का आतंक रहा है l
किन्तु देवगढ़ इसका अपवाद रहा है क्योकि देवगढ़ और दस्यु गिरोहों के 
बिच ठाकुर नाम की मजबूत दिवार खड़ी थी l
ठाकुर के पास हथियारों से सुसज्ज प्राईवेट आर्मी भी है जो इन 
दस्युओ का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पर्याप्त है और इसी कारणवश किसी 
दल की हिम्मत नहीं यहाँ का रूख करने की l
उनकी प्राईवेट आर्मी को सहयोग करता है फ़ॉरेस्ट ऑफिसर अविनाश , 
जो ठाकुर की बेटी ‘’मधुराक्षी ‘’ का कॉलेज के समय से प्रेमी रहा है और 
उसके इस देवगढ़ में होने की केवल वही एक वजह है ,ठाकुर दोनों के प्रेम से अनजान है l
एक अफवाह के अनुसार चम्बल के आसपास के बड़े गिरोहों को कोइ नया गिरोह
 तेजी से खत्म कर रहा है , नये गिरोह में केवल आठ सदस्य है और उन्होंने सौ
 दस्युओ के गिरोहों तक का सफाया कर दिया है l 
और ठाकुर सब इन सबसे चिंतित है उनके लिए यह दल एक पहेली है के
 कैसे इतने कम सदस्यों वाला दल चम्बल के खूंखार से खूंखार दलों का सफाया कर
 रहा उनमे जरुर कोई असाधारण बात है और वे चाहते है के उस दल की कुदृष्टि 
कभी देवगढ़ पर न पड़े l
और एक दिन वही हुवा जिसका डर था ,भेड़िया खान का एक दूत देवगढ़ के
 समर्पण का सन्देश लेकर मधुराक्षी के सामने जा पहुंचा ,
किन्तु मधुराक्षी और देवगढ़ वासियों ने उस दूत का सर काटकर भेड़िया खान के 
लिए सन्देश स्वरूप गाँव की हद के बाहर टांग दिया l
और यही उनकी भयानक भुल साबित हुयी , जिसका खामियाजा सारे देवगढ़ को भुगतना पड़ा , भेड़िया खान ने दल के साथ देवगढ को न सिर्फ तहस नहस कर दिया 
बल्कि मधुराक्षी को भी जलालत भरी जिन्दगी का श्राप दे दिया l
अविनाश के सामने ही सब कुछ होता है लेकिन वो कुछ कर नहीं पाता जिस
 वजह से शर्मिंदगी के कारण वह देवगढ़ से चला जाता है l 
दो साल बाद जब वह देवगढ़ लौटता है तब गाँव बदल चूका है और बदल चुकी है मधुराक्षी ,
इंतकाम की आग में जलती मधुराक्षी ने आवाहन किया है ‘’कारवां ‘’ का l
कारवाँ के बारे में किवदन्ती है के वह पिशाचो का एक दल है ,
जिसकी प्रमुख ‘’भैरवी’’ है , अब मधुराक्षी भेड़िया खान से बदला लेने की तैय्यारी में है l
यहाँ से शुरू होती है असली कहानी ,कारवाँ पढ़ कर जहा ‘’भैरवी’’ और
 उसके दल की दरिंदगी ने सिहरन दौड़ा दी थी तो यहाँ भेड़िया खान के रूप में उससे
 भी बढ़ कर दरिंदा निकला जो केवल दरिंदा की उपमा नहीं है बल्कि असल में दरिंदा ही है l
विक्रम का इस तरह की बातो में बिलकुल भी यकीन नहीं है 
और वह भेड़िया खान को मारने के लिए पूरी तरह से तैय्यार होकर आया है ,
अब देवगढ़ एक खुनी जंग का मैदान बन चूका है जहा कुछ होगा तो वो 
है रक्त और लाशों ढेर l
मधुराक्षी ,अविनाश ,भैरवी ,भेड़िया खान जैसे खून के प्यासे अब अपनी हर 
दरिंदगी की इन्तिहाँ के लिए सज्ज है l
इस कहानी में न कोई नायक है न खलनायक , 
यहाँ हर चरित्र स्वयं यह दोनों गुण लिए हुए है और अपनी प्रवृत्ति के अनुसार ही है l
128 पृष्ठों में कहानी को पर्याप्त तेजी और गति दी गयी है ,
बेवजह के पैनल्स या भटकाव बिलकुल भी नहीं है l 
कहानी का डार्क ट्रीटमेंट और माहौल एक अलग ही आभासी दुनिया का 
निर्माण करता है जिसकी वास्तविकता की कल्पना भी रीढ़ की हड्डियों में
 सिहरन दौड़ा देने के लिए पर्याप्त है l
कहानी चूँकि मैच्योर कंटेंट लिए हुए है इसलिए इसमें अपशब्द ,
खून खराबे की भरमार है , वैसे भी जहा पिशाच और दरिन्दे हो वहा
 यदि खून खराबा न हो तो कहानी की विभत्सता को दर्शाया ही नहीं जा सकता l
पढने से पहले यह जरुर मानकर चले के कॉमिक्स वाकई में बच्चो की चीज नहीं है ,
 भाषा कई जगहों पर अखर भी सकती है किन्तु परिवेश के अनुसार कही
 सही लगती है तो कही अतिरेक भी है l
कहानी का ट्रीटमेंट बढ़िया है ,पढ़ते हुए पूरा वातावरण सामने आता है , 
और आप भी उस दुनिया में पहुँच जाते है जहा न कानून है न कोई टेक्नोलोजी , 
जहा कुछ है तो घुटन है ,दहशत है , कुछ डरावने ख़्वाब जिसके हकीकत में होने 
की आप सोच भी नहीं सकते l
कहानी से सही न्याय करता है आर्ट डिपार्टमेंट , बेजोड़ भले ही न कहू किन्तु
 आर्ट मनमोहक है और पूरी तरह से एक होरर और मैच्योर कंटेंट के साथ न्याय करता है ,
 कलरिंग से आर्ट में चार चाँद लगते है कलरिंग काफी बढ़िया है खासकर खून खराबे 
वाले दृश्यों पर , अंग्रेजी में पता नहीं क्यों खून खराबे के कुछ दृश्य डल से लगे थे
 किन्तु हिंदी में शायद कुछ बदलाव किया गया हो क्योकि मुझे 
ऐसा कही कुछ दुबारा दिखा नहीं l
नॉवेल का साईज भी काफी बढ़िया एवं स्लिक है जो इसे काफी आकर्षक बनाता है l
एक बढ़िया होरर कंटेंट लिए हुए है ‘’खुनी जंग ‘’ जो मधुराक्षी का ओरिजिन भी बतलाता है ,जिसका कहर हमने कारवां में देखा था , उस खुनी मधुराक्षी के पीछे की कहानी काफी मर्मान्तक है जिसे आप अवश्य पढना चाहेंगे l
बाकी अब ‘’कारवां ‘’ खुद बी खुद सीरिज बन चुकी है जिसका तीसरा इंस्टालमेंट 
आने की घोषणा भी हो चुकी है l

मैच्योर कंटेंट ,बढ़िया आर्ट ,होरर प्रेमी ,खून और गोर पसंद करनेवाले पाठको के लिए यह एक जबरदस्त ट्रीटमेंट है l 

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

कॉमिक्स ट्रेंड एवं दीवाने फैन्स -भाग 3

चूँकि मै खुद एक कॉमिक्स प्रेमी हु ! और बढती उम्र के साथ मेरा यह जूनून दोबारा से लौटा है ,
किन्तु सोशल मीडिया के इस युग ने मुझे और भी लोगो से मिलने जुलने का मौक़ा दिया
जो जूनून की हद तक कॉमिक्स के दीवाने है !
मेरी अगली कुछ ब्लॉग पोस्ट्स इन्ही कॉमिक ट्रेंड दिवानो पर आधारीत होगी !
इस तहत मै इनके द्वारा लिखी गई फेसबुक पोस्ट्स को अपने ब्लॉग के जरिये शेयर करूँगा !
ताकि लोगो का यह भ्रम टूट सके के कॉमिक्स अभी भी बच्चो की चीज है !
ज्यादा भूमिका न बंधते हुए आपको सीधे मिलाते है उन फैन्स से
 जिनकी दीवानगी से आप प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएंगे .
आशीष रस्तोगी ! और उनका कॉमिक्स प्रेम 
प्रथम है 'आशीष रस्तोगी ' ! उनकी दीवानगी उन्ही की शब्दों में !
प्रिय संजय गुप्ता जी और समस्त राज कॉमिक्स परिवार को मेरा 
सादर नमस्कार साथ ही आप सभी को क्रिसमस (बड़े दिन ) की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनायें !!!
" संजय जी !! राज कॉमिक्स मेरी प्रेरणा है और मैं राज कॉमिक्स का उस समय
 से नियमित पाठक हूँ जिस समय इसका मूल्य मात्र ४/ रुपये होता था. 
उस समय राज कॉमिक्स का प्रारम्भिक काल चल रहा था, और भूतकाल 
की कहानियाँ तथा जासूसी कहानियाँ आती थीं, और मेरे तहेरे, 
चचेरे भाई इनको किराये पर २५ पैसे प्रति कॉमिक्स की दर पर पढ़ने हेतु लाते थे,
एक् दिन मैने भी कॉमिक्स पढ़कर देखी, बड़ा मज़ा आया, गगन, 
विनाषदूत आदि सुपर हीरोज के आने के कुछ समय उपरांत राज कॉमिक्स
 में उदय हुआ सर्वशक्तिमान महान सुपरहीरो नागराज का, और फिर मस्तिष्क 
के महाराज सुपर कमाण्डो ध्रुव का !! 
बस तभी से मेरा राज कॉमिक्स के प्रति अखंड अमरप्रेम उत्पन्न हुआ 
मैं हर सेट को किराये पर लेकर पढ़ने लगा, लेकिन इसकी कहानियाँ
 इतनी रोचक और मनोरंजक होती थीं के बार बार पढ़ने का मन करता था. 
लेकिन हमारी आर्थिक स्थिति कमज़ोर थी, मेरे दादा जी बॅंक के ख़ज़ांची पद से रिटायर हो चुके थे
 और अपनी एक जनरल स्टोर की दुकान चलाते थे, पिताजी अध्यापन कर रहे थे . 
फिर भी कॉमिक्स के प्रति अपने प्रबल प्रेम के कारण मैने अपना जेब खर्च बचाकर 
कॉमिक्स खरीदकर उनका संग्रह करना शुरू किया, साल दर साल धीरे-धीरे
 मेरे पास खासा कॉमिक्स संग्रह हो गया, एक दिन मेरे दादा जी ने मुझे 
कॉमिक्सों को दुकान पर रखकर किराये पर चलाने का सुझाव दिया, 
बात मेरी सांझ में आ गयी और मैने ऐसा ही किया. 
अब कॉमिक्सों से होने वाली आय द्वारा ही मैं नयी कोमिक्से खरीदने लगा, 
जिससे मेरा जेबखर्च भी बच जाता और हमारी आर्थिक सहायता भी हो जाती, 
हर नया सेट डीलर द्वारा सबसे पहले मेरे पास आता था और नये सेट की मेरे पास एडवांस बुकिंग रहती थी, कभी कभी तो मुझे नये सेट की तीन तीन प्रतियाँ लेनी पड़ती थी. 
जिस समय मैने अपना ये पुस्तकालय प्रारभ किया तब मैं पांचवीं कक्षा का विद्यार्थी था 
स्कूल से बचा बाकी टाइम मैं दुकान पर देता और रात में अपनी पढ़ाई करता था , 
मैने अपना ये पुस्तकालय ७वर्ष तक लगातार चलाया, फिर दादा जी के देहावसान के 
बाद जब मैं १२ वीं कक्षा में था तब घरवालों की सख्ती के कारण पढ़ाई पर ध्यान 
देने हेतु मुझे अपने हृदय पर पत्थर रखकर अपना कॉमिक्स संग्रह विक्रय करना पड़ा , 
वो मेरी ज़िंदगी का एक अत्यंत दुखद और कठोर लम्हा था, 
लेकिन फिर भी मैने अपनी कुछ चुनिंदा और उत्तम कोमिक्से बचा लीं थी, 
राज कॉमिक्स के प्रति मेरा प्रेम अटूट था इसलिये मैने नये सेट की चुनिंदा 
कोमिक्से खरीदना जारी रखा और दोबारा अपना संग्रह बनाया जिसका छायाचित्र
 (करेंट फोटो )आपको भेज रहा हूँ.
लेकिन उस दौर में पहले जिस सरलता से कॉमिक्स उपलब्ध थी वैसे आज नहीं हैं
 क्योकि वीडीओ गेम्स और इंटरनेट के चलन से इसके व्यवसाय पर बहुत असर पढ़ा
 और धीरे- धीरे कई प्रकाशन केन्द्र बंद हो गये, केवल राज कॉमिक्स ही अपनी उत्कृष्ट
 और अनोखी ज्ञानवर्धक प्रेरणादायक कहानियों तथा राज कॉमिक्स के दीवाने पाठक प्रेमियों के कारण बच पायी है. 
लेकिन आज इस मंहगाई के दौर में कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण 
कॉमिक्स के मूल्य भी आसमान छू रहे हैं जिसके कारण कॉमिक्स खरीदना 
हर पाठक के लिये सहज नहीं है और हर जगह सरलता से उप्लब्ध भी नहीं है मुझे भी
 इस साल से ऑन लाइन स्टोर से ही ऑर्डर करके लेनी पढ रही है
वर्षों गुजर गए किन्तु मेरा कॉमिक्स प्रेम अभी तक कायम है और हमेशा रहेगा मैं अपने अंदर के बच्चे को कभी बड़ा नहीं होने दुंगा ,
संजय सर !!!!!!!! आजकल राज कॉमिक्स से वो पुराना मज़ा गायब है, 
फिर भी कहानिया अत्यंत प्रभावशाली,गूढ और मनोरंजक होती हैं
लेकिन "सर्वनायक" सीरीज में आपने सभी नायकों को एकत्रित करके उन 
पुरानी यादों को फिर से जीवंत कर दिया है,मेरा सपना था की भोकाल और
 नागराज एक साथ आयें या फिर ऐसा हो के भोकाल का पुनर्जन्म नागराज
 के रूप में हो और किसी अवसर विशेष पर भोकाल शक्ति नागराज को मिल जाये,
 खैर "सर्वनायक" राज कॉमिक्स की सर्वोत्तम भेंट है इसकी उत्सुकता " नागायण" 
सीरीज की भांति बनी रहेगी बस आप थोडा आर्टवर्क पर विशेष ध्यान दीजिये, 
खासकर नायकों की शारीरिक बनावट और चेहरों पर !! "सर्वयुगम" पढकर 
निराशा हुई ये अपने आधारखंड " युगांधर " के सामने निर्बल रह गया, आशा है 
की आगामी खंड " सर्वदमन " निराश नहीं करेगा, बस कृप्या आप इस महानतम
 श्रंखला को ज्यादा लंबा ना खीचें और जल्दी जल्दी इसके आगामी भाग प्रकाशित करें अंत में 
सुनील कुमार द्वारा उनके घर की बाहरी दीवारों पर बनाये उनके चित्र 
आपको और समस्त राज कॉमिक्स परिवार को मेरी ओर से " युगम धरित्री अस्यः "!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
राज कॉमिक्स है मेरा जुनून
"आशीष रस्तोगी "
अगले दीवाने है ''सुनील कुमार ' जी ! जिन्होंने अपने कॉमिक्स प्रेम डूबकर 
अपने घर की दीवारों को ही कॉमिक्स प्रेम का जरिया बना लिया और अपने कॉमिक्स पात्र 
को दिवार का हिस्सा बना लिया उन्हें चित्रित करके ! इनका उद्देश्य है के लोग 
इन चित्रों से उत्सुक होकर इन पात्रो के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने का प्रयत्न करे ! 
सुनील कुमार द्वारा उनके घर की बाहरी दीवारों पर बनाये उनके चित्र 


राजिव रोशन 
 —कॉमिक्स फैन राजिव रोशन जी के शब्द 
मुझे लगता है की मैं बहुत छोटा सा प्रशंसक हूँ कॉमिक वर्ल्ड का लेकिन हूँ तो सही| 
अपनी पुस्तक पढने की शुरुआत तो मैंने इसी ट्रेंड से की थी| हाँ, मुझे अब भी अच्छी तरह याद है, 
मेरे घर के करीब ही मेरा के मित्र कॉमिक्स की दूकान लगाता था और कॉमिक्स 
को किराए पर दिया करता था (अब उसने ऐसा करना बंद कर दिया है)| मेरा एक मित्र राजेश
 शर्मा जो कॉमिक्स पढने का शौक़ीन था उसने मुझे कॉमिक्स पढने की आदत लगाईं और 
मैं इसके लिए उसका तहे दिल से जिन्दगी भर शुक्रगुजार रहूँगा| अब वैसे मैंने कॉमिक्स पढना
 बंद किया हुआ है लेकिन दिल तो हमेशा बच्चा ही रहता है| इसलिए आप सभी के साथ जुड़ा हुआ, 
ताकि भविष्य में ऐसा न लगे की मैंने अपने बचपन को खो ही दिया है|
आइये "डोगा दिवस" पर डोगा के बारे में बात करते हैं भारतीय कॉमिक्स किरदारों में "डोगा" 
एक ऐसा किरदार बनकर उभरा जिसे वर्ग के पाठकों ने पसंद किया| हालांकि 
दुसरे कॉमिक किरदारों की तुलना में डोगा के कॉमिक्स में हिंसा की अधिकता रहती थी 
लेकिन हम भारतीय पाठक वर्ग भी हिंसा को मनोरंजन का हिस्सा मानते हैं|
जब मैंने पहली बार डोगा का कॉमिक्स पढ़ा था (याद नहीं कौन सा था), 
तो मुझे यह किरदार बहुत पसंद आया था| मुझे डोगा का कांसेप्ट बहुत पसंद आया 
क्यूंकि इस कांसेप्ट पर क्या कभी किसी ने सोचा होगा| मुझे ख़ुशी हुई थी की यह 
कम से कम वैम्पायर और भेड़िया जैसा किरदार तो नहीं है जो की कल्पनाओं से परे था| 
अजीब लगता था यह जानकार की एक वैम्पायर ने जब इंसान को काटा तो वाह भी वैम्पायर बन गया| 
शुक्र था की "डोगा" ऐसा नहीं था|
एक समाज के व्यक्ति का समाज के अपराधिक तत्वों के खिलाफ ओढा गया लबादा था "डोगा"| 
डोगा वह किरदार है, जिसे मैं बैटमैन से तुलना कर सकता हूँ| जिस प्रकार से अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बैटमैन अपना स्थान बनाता है वैस ही डोगा का स्थान भारतीय पाठकों के बीच है|
क्यूंकि ८-१० वर्ष हो चुके हैं कॉमिक्स को पढ़े हुए , इसलिए इससे अधिक साझा नहीं कर पाउँगा|
आभार
राजीव रोशन

( ''कॉमिक्स ट्रेंड एवं दीवाने फैन्स'' जारी है अगली कड़ीयो में )

रविवार, 20 जुलाई 2014

कॉमिक्स ट्रेंड एवं दीवाने फैन्स -भाग 2 ( मेरा कॉमिक्स प्रेम भाग =2 )

पिछली पोस्ट में चर्चा हुयी थी मेरे पसंदीदा कॉमिक्स चरित्र 'डोगा ' से मेरी पहली मुलाक़ात की
! इस पोस्ट में जिक्र होगा मेरी अपने हीरो ‘सुपर कमांडो ध्रुव ‘ से पहली मुलाक़ात का .

तब मुश्किल से चौदह पन्द्रह साल का रहा होऊंगा ( ठीक से याद नहीं ),
मै अपनी माँ के साथ अस्पताल गया हुवा था ,कुछ रूटीन चेक अप के लिए ,रास्ते में आते समय सडक के किनारे 
एक पुस्तक की स्टाल पर नजर पड़ी ,जहा रंगबिरंगी और आकर्षक मुखपृष्ठ वाली पुस्तके रखी हुयी थी !
जिसे देखकर मन ललचाया ,मैंने माँ से जिद की ‘आई मुझे यह किताब ले दो न ‘
 ( ‘’माँ ‘ को मराठी में आई ही कहते है ) माँ ने मना किया ,लेकिन मेरे दो बार कहने पर ले दिया .
मै ख़ुशी से उछल ही पड़ा और किताबो के ढेर के सामने खड़ा हो गया ,और मैंने उपर रखी हुयी किताब झट से उठा ली ,
उसका नाम था ‘विडिओ विलेन ‘ ! सुपर कमांडो ध्रुव की कॉमिक्स ,और उसके उठाने के पश्चात मैंने उसके 
निचे और भी कई आकर्षक कॉमिक्स देखि ,लेकिन सोचा माँ गुस्सा करेगी इसलिए एक ही लि ,
मुझे उस वक्त पता नहीं था के वह कैसी कॉमिक्स है ,कौन नायक है ,क्या कहानी है ,
लेकिन कवर पर एक युवक को देखा जो एक गहरी खाई पर एक रस्सी पर खड़ा था और उसके गले में एक फंदा भी कसा हुवा था ,
उसके ठीक सामने ही हाथ में फरसा लिए एक लाल पोशाक में नकाबपोश खड़ा था उसी रस्सी पर !
मैंने उस नकाबपोश और उस युवक को देखकर ही अंदाजा लगा लिया के यह युवक ही नायक है कहानी का !
 नकाबपोश कितना क्रूर लग रहा है ,और उसके गले में फंदा भी नहीं पड़ा है और हाथ में हथियार भी है ! 
इसका मतलब यह बुरा व्यक्ति है , वह कवर तो आप सभी फैन्स जानते है किसने बनाया था
 लीजेंडरी आर्टिस्ट स्वर्गीय ‘प्रताप मलिक ‘ जी ने !
मैने घर पहुँचते ही कॉमिक्स उठायी और घर के बाहर चल दिया , 
और हमारे घर से थोड़ी ही दूरी पर एक मैदान था उसके किनारे पर कुछ बड़े बड़े पत्थर थे ,
दो पत्थरो ने एकदूसरे से जुड़कर कुर्सी की शक्ल ले ली थी ,मै वही आराम से अधलेटी अवस्था में कॉमिक्स पढने लगा ,
जब पढनी शुरू की तो बस बस पढ़ते ही गया और खत्म करके ही उठा ,
उस दिन सच में बहुत आनन्द आया ! बालमन प्रसन्न हो गया के मी पास ऐसी पुस्तक है ,
अनुपम सर जी के चित्रों ने मन को मोह लिया था ! और कथानक भी उसी हिसाब से रोमांचक ,
 बस उसके बाद ध्रुव का ऐसा क्रेज जगा के किसी भी तरह से ध्रुव के कॉमिक्स के जुगाड़ में लगा रहने लगा ,
और ध्रुव के चक्कर में नागराज से भेंट हुयी ,फिर डोगा से भेंट हुयी
 ( डोगा से भेंट हुयी उसकी कॉमिक्स ‘खाकी और खद्दर ‘ से ,) 
और हम कॉमिक्स मय होते चले गए ! उस समय तो इंटर नेट से कभी पाला ही नहीं पड़ा था और ना ही क्रेज था ,
टीवी पर भी सैकड़ो चैनल नहीं होते थे ,एक्का दुक्का चैनल उसमे भी हम बचो के मतलब के चुनिन्दा मगर सबसे बेहतरीन कार्यक्रम ,
बस यही हम बच्चो के मनोरंजन के साधन थे ! 
और अब इस मनोरंजन में कॉमिक्स भी जुड़ गयी और ऐसे जुडी के अब तक बरक़रार है ! 
ध्रुव में मुझे जो पसंद आया था वह था उसका बिना किसी सुपर पावर का होना ( बाद में भले ही कुछ मिल गए ) 
और उसकी सीधी सपाट मगर रोमांचक कहानिया ,ध्रुव की हर कॉमिक्स अपनेआप में बेजोड़ थी !
लेकिन जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई थी ,बहुत ज्यादा वह थी ‘मुझे मौत चाहिए ,वू –डू ,रुन्हो का शिकंजा ,उड़नतश्तरी के बंधक ,
( इन कॉमिक्स के बारे में मेरा मानना यह है के यदि कोई नया व्यक्ति भी ध्रुव की यह कॉमिक्स पढ़ ले तो वह ध्रुव का फैन हो जायेगा ) 
ओह्ह नाम गिनवाते गिनवाते मुझे ऐसा लग रहा है के मै शायद ध्रुव की नब्बे प्रतिशत कॉमिक्स का नाम लिख दूंगा ,
इसलिए रहने दीजिये भाई .
इसी बिच मै बड़ा हुवा ,समझदार हुवा और कॉमिक्स का शौक कही पीछे छूट गया !
 तेरह साल हो गए कॉमिक्स की तरफ देखा भी नहीं ,ऐसे में फेसबुक से अपने ग्रुप से जुड़ा 
और फिर से अंदर का बच्चा ललचाया जो नीली –पिली ड्रेस पहनने वाल सीधे बाल काढ़े लडके के कारनामो का दीवाना था ,
 तो मैंने एकाध बिच की कहानिया पढ़ी ,तो देखा ध्रुव की जिन्दगी में आये हुए कुछ बदलावों को ,
तब लगा अरे यह क्या ? इतना सब कुछ कैसे हो गया ?
( ऐसा महसूस हुवा मानो जैसे हम किसी पुराने दोस्त के जीवन में आये अनपेक्षित बदलावों से विचलित हो जाते है ,
वही भावना आई ,उत्सुकता जगी ) 
और फिर वही उत्सुकता के कारण दोबारा कॉमिक्स के पागलपन ने आ घेरा और फिर तेरह साल बाद मै 
अपने बचपन के सच्चे दोस्त से मिला ,जो मेरे साथ साथ बड़ा हुवा .
हम फैन्स का जूनून ही है के हम एक काल्पनिक पात्र को भी अपने जीवन का हिस्सा मानते है 
और उसके सुख दुःख में हँसत रोते है ,
और उसकी कमांडो फ़ोर्स के तर्ज पर हम खुद को कैडेट और ध्रुव को ‘कैप्टेन ‘ कहकर अपना सम्मान व्यक्त करते है .
इसी उपलक्ष्य में हम सभी फैन्स ने वोटिंग के तहत ग्यारह मई और बारह मई को ‘’ध्रुव दिवस ‘’ के रूप में मनाया ! 
यह वोटिंग शोशल साईट फेसबुक के जरिये कई कॉमिक ग्रुप्स पर की गई ! और इसे बहुत बढ़िया प्रतिसाद भी मिला ,
और यह देखकर ख़ुशी हुयी के ‘कैडेट्स ‘ आज भी अपने ‘कैप्टेन ‘ को चाहते है ,हद से ज्यादा .
सैल्यूट कैप्टेन ,!

‪#‎कॉमिक्स_ट्रेंड_फिर_बढाए‬

रविवार, 6 जुलाई 2014

कॉमिक्स ट्रेंड एवं दीवाने फैन्स -भाग 1

कुछ समय पूर्व ‘कॉमिक्स ‘ एक बंद होता कल्चर था ! 
किन्तु तेजी से फैलते शोशल मिडिया के इस युग ने
कई संस्थानों में जान फूंकने का कार्य बखुबी किया है ,जिनमे से एक है ‘कॉमिक्स ‘ 
कोई चाहे जितनी बाते कर ले किन्तु इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता के ‘कॉमिक्स ट्रेंड ‘ 
को बढाने के पीछे ‘शोशल मिडिया ‘ एवं कॉमिक्स फैन्स का बहुत बड़ा योगदान है .
फेसबुक पर ही आधा दर्जन से अधिक कॉमिक्स ग्रुप्स है जिनके सदस्यों की संख्या हजारो में है ! 
पेजेस की गिनती ही नहीं .
ऐसे ग्रुप्स में आये दिन फैन्स अपना उत्साह दिखाते रहते है ! जिस तरह बचपन में नयी कॉमिक्स हाथ में आते ही हम सभी उसे अपने यारो दोस्तों को दिखाने में ख़ुशी पाते उसी प्रकार अब कॉमिक्स ग्रुप पर भी यह दिखाई देता है ,
जब उम्र को पीछे धकेल कर कॉमिक फैन सिर्फ बच्चा बन जाता है और ‘अपने ऑर्डर ‘ किये नए सेट के मिलते ही ‘बावला ‘ हो जाता है और ऑर्डर की तस्वीर शेयर करके सबकी वाहवाही भी लूटता है ! 
और उनकी तस्वीरो पर कमेंट्स एवं लाईक्स बरसते है,'बधाई हो ''बधाई हो 'का ताँता ऐसा लगता है 
मानो कॉमिक सेट का निकलना एवं मिलना भी एक त्यौहार हो गया हो ,
कॉमिक फैन्स के इसी उत्साह को देखते हुए मैंने ग्रुप्स पर चहलकदमी करके उन फैन्स की 
पोस्ट्स का स्नैप यहाँ इस पोस्ट में शेयर किया है जिसमे उन्होंने नए सेट के मिलने पर अपनी 
प्रतिक्रिया दी है ,कॉमिक ग्रुप्स पर कॉमिक ट्रेंड को बढाने के लिए विभिन्न तरह से टास्क ,
प्रतियोगिताये एवं ट्रेंड्स भी होते है जिसका उद्देश केवल कॉमिक ट्रेंड को फैलाना ही है 

तस्वीरे कुछ ग्रुप्स से साभार ली हुयी है , Indian comics universe fan club एवं Indian Comics Fans Junction
कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
आलोक सिंग परमार जी की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
अविनाश तिवारी जी की पोस्ट !

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
दीपक पूनिया 
जी की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
देवेन पाण्डेय ( मै ) की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
फील डी ब्लेंड की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
हीरा लाल भारद्वाज की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
लोकेश गौतम की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
मनोज कुमार की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
मुकेश गुप्ता एवं अमन कुमार जी की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
प्रदीप वर्मा की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
संदीप सिंग की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
शहाब खान की पोस्ट 

कॉमिक्स ट्रेंड फिर बढ़ाये
सुमित सिन्हा की पोस्ट 

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